कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी लबों पे रखता था
दोनों आँखों से चूमता था
झुकाके पेशानी यूँ अकीदत से छू रहा था
जो आयते पढ़ नहीं सका
उन के लम्स महसूस कर रहा हो
मैं हैराँ हैराँ गुज़र गया था
मैं हैरां हैराँ ठहर गया हूँ
तुम्हारे हाथों को चुम कर
छू के अपनी आखोंसे आज मैंने
जो आयते पढ़ नहीं सका
उन के लम्स महसूस कर लिए हैं
गुलज़ार
No comments:
Post a Comment