Tuesday, 2 January 2018

काश हो ऐसा की हम दोनों बन जाये सरगम और साज़
काश हो ऐसा मेरे सुर की बन जाओ कभी तुम आवाज़
काश हो ऐसा मैं हूँ दिया इक और दिए की बाती तुम
और जब तम ढक लेता मुझको दीपशिखा बन जाती तुम-                                           तम -- अँधेरा
मन के पनघट पर जिस दिन लेकर गागर आओ तुम
फिसल के इसमें गिर जाओ और कभी निकल न पाओ तुम
क्या है भरोसा इस जीवन में उदय-अस्त का ए प्रियतम
काश हो ऐसा उषा बनकर जीवन में आ जाओ तुम
तुम्हे कभी जब चोट लगे तो  आह मेरे दिल से निकले
काश हो ऐसा समय पिघल कर अपने प्रेम में आ पिघले
काश हो ऐसा हम मिल जाये ऐसे जैसे नदी में नीर
काश हो ऐसा पा लू तुमको जैसे खुदा को पाए फ़कीर
गला घोंट दे काल की रस्सी सांस की डोरी टूटे जब
तेरी नज़र का साया हो बस तेरी बांह में सर हो तब
सपना हो चाहे ये  सारा कितना प्यारा है हमदम
काश हो ऐसा हाथ हो मेरा हाथ में तेरे मरते दम

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